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दशहरे को विजयादमशी क्यों कहते हैं , dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein, dussehra essay in hindi, vijayadashami dussehra essay in hindi

दोस्तों, आज आपके लिए एक नई जानकारी। दशहरा के बारे में है यह जानकारी। dussehra vijayadashami ke bare mein hindi me. अक्सर लोग गूगल पर सर्च करते हैं कि दशहरा कब पड़ता है? दशहरा को विजयादशमी क्यों कहते हैं? दशहरा क्यों मनाते हैं? विजयादशमी क्यों मनाते हैं? इन सारे सवालों का जवाब आज इस आर्टिकल में आपको मिल जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं। दोस्तों इसे शेयर जरूर कर दीजिएगा लव यू…।

जैसा कि आप जानते हैं कि दशहरा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसे विजया दशमी या दशहरा जैसे नामों से भी जाना जाता है। “दशहरा” या दशहरा का अर्थ है दस सिर वाले राक्षस रावण पर भगवान राम की जीत। इसलिए, यह बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है और मानव जाति को याद दिलाता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होगी।

कब होता है यह त्योहार | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

विजयादशमी का त्यौहार वर्षा ऋतु की समाप्ति तथा शरद के आरम्भ का सूचक है। इन दिनों में दिग्विजय यात्रा तथा व्यापार के पुनः आरम्भ की तैयारियाँ होती हैं। चौमासे में जो कार्य स्थगित किये गये होते हैं उनके आरम्भ के लिए साधन इसी दिन से जुटाये जाते हैं। क्षत्रियों का यह बहुत बड़ा पर्व है। इस दिन ब्राह्मण लोग सरस्वती पूजन, क्षत्रिय शस्त्र-पूजन आरम्भ करते हैं। विजयदशमी या दशहरा इसीलिए राष्ट्रीय पर्व है।

राम से कैसे जुड़ी है दशहरे की कहानी | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

दशहरा उस दिन को चिह्नित करता है जब भगवान राम ने रावण को मार डाला और अपनी पत्नी देवी सीता को लंका में अपने महल से मुक्त कर दिया। साथ ही, इसी दिन देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। वह 9 रातों तक राक्षस से लड़ी और 10वें दिन की शाम को उसने उसे मार डाला। महाकाव्य महाभारत के अनुसार, एक और पवित्र कथा जो इस दिन को विशेष बनाती है, वह है पांडवों की उनके राज्य का दावा करने के लिए निर्वासन से वापसी।

इस पर्व के लिए श्रवण नक्षत्र युक्त, प्रदोषव्यापिनी, नवमीविद्धा दशमी प्रशस्त होती है। अपराह्नकाल, श्रवणनक्षत्र तथा दशमी का प्रारंभ विजय यात्रा का मुहूर्त माना गया है। दुर्गा विसर्जन, अपराजिता पूजन, विजय प्रयाण, शमीपूजन तथा नवरात्र पारण इस पर्व के महान कर्म हैं। इस दिन संध्या के समय नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है।

दशहरे के दिन क्या करना चाहिए | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

इस दिन प्रातः काल देवी का विधिवत पूजन करके नवमी विद्धा दशमों में विसर्जन तथा नवरात्र का पारण करना चाहिए। अपराह्न बेला में ईशान दिशा में शुद्ध भूमि पर चंदन, कुकुंम आदि से अष्टदल कमल का निर्माण करके सम्पूर्ण सामग्री जुटा कर अपराजिता देवी के साथ जया तथा विजया देवियों के पूजन का भी विधान है। शमी वृक्ष के पास जाकर विधिपूर्वक शमी देवी का पूजन करके शमी वृक्ष के जड़ की मिट्टी लेकर वाद्य यंत्रों सहित वापिस लौटना चाहिए। यह मिट्टी किसी पवित्र स्थान पर रखनी चाहिए। इस दिन शमी के कटे हुए पत्तों अथवा डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए।

बंगाल में यह उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। देश के कोने-कोने में इस पर्व से कुछ दिन पूर्व रामलीलाएँ शुरू हो जाती हैं। सूर्यास्त होते ही रावण, कुम्भकरण तथा मेघनाथ के पुतले जलाये जाते हैं।

इस पर्व को भगवती के ‘विजया’ नाम पर भी विजया दशमी कहते हैं। साथ ही इस दिन भगवान रामचन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास भोग कर तथा रावण का वध करके अयोध्या में पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को ‘विजया दशमी’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ला दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक काल होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है।

दशहरा कब मनाया जाता है | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

दशहरा हिंदू महीने अश्विन में शुक्ल पक्ष के 10 वें दिन मनाया जाता है। इस अवधि के पहले 9 दिनों को “नवरात्रि” कहा जाता है और उन्हें पवित्र माना जाता है। नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के सभी रूपों की पूजा की जाती है और दसवीं दशहरा के दिव्य उत्सव के साथ उत्सव का समापन होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार सितंबर या अक्टूबर में पड़ता है।

दशहरा कैसे मनाया जाता है | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

उत्तरी भारत और महाराष्ट्र में, दशहरा रावण पर भगवान राम की जीत की याद दिलाता है। रामायण पर आधारित कई नाटक और नाटक “पंडालों” में बनाए गए हैं और उन्हें “रामलीला” कहा जाता है। लोग भजन गाते हैं और विशाल परेड और बाहरी मेले लगते हैं।

रावण, उनके पुत्र मेघनाद और उनके भाई कुंभकर्ण की आतिशबाजी, अलाव और पुतले जलाना उत्सव के महत्वपूर्ण भाग हैं। नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के सभी 9 रूपों की पूजा करने की परंपरा है। लोग नवरात्रि के पहले दिन उपवास रखते हैं और मिट्टी के बर्तन में जौ लगाते हैं। दशहरे पर इन स्प्राउट्स का उपयोग किया जाता है और इन्हें भाग्य का प्रतीक माना जाता है। | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein के तहत अब जानिए की इसकी कथा क्या है।

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दशहरा की कथा क्या है | dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein

एक बार पार्वती जी ने दशहरे के त्यौहार के फल के बारे में शिवजी से प्रश्न किया। तब शिवजी ने ‘विजयकाल की चर्चा करते हुए बताया कि शत्रु पर विजय पाने के लिए राजा को इसी समय प्रस्थान करना चाहिए। इस दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है। महाराज रामचन्द्र जी ने इसी विजयकाल में लंका पर चढ़ाई की थी। शत्रु से युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल में राजाओं को सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। इस काल में शमी वृक्ष ने अर्जुन का धनुष धारण किया था।

फिर पार्वती जी के यह पूछने पर कि शमी वृक्ष ने अर्जुन का धनुष कब धारण किया था। रामचन्द्र जी से कब कैसी प्रिय वाणी कही थी, शिवजी ने जवाब दिया- दुर्योधन ने पांडवों को जुए में पराजित करके बारह वर्ष के वनवास के साथ तेरहवें वर्ष में अज्ञातवास की शर्त दी थी।

dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein के तहत आप पूरी कथा पढ़िए नीचे।

तेरहवें वर्ष यदि उनका पता लग जाता तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास भोगना पड़ता। इसी अज्ञातवास में अर्जुन ने अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था तथा स्वयं बृहन्वला वेश में राजा विराट के पास नौकरी कर ली थी। जब गो-रक्षा के लिए विराट के पुत्र कुमार ने अर्जुन को अपने साथ लिया तब अर्जुन ने शमी वृक्ष पर से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। विजयादशमी के दिन रामचन्द्र जी के लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करते समय शमी वृक्ष ने रामचन्द्र जी की विजय का उद्घोष किया था। विजय काल में शमी-पूजन इसीलिए होता है।

एक बार श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया- राजन्! विजयादशमी के दिन राजा को स्वयं अलंकृत होकर अपने दासों और हाथी-घोड़ों का श्रृंगार करना चाहिए। वाद्य यंत्रों सहित मंगलाचार करना चाहिए। पुरोहित को साथ लेकर पूर्व दिशा में सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। वहाँ वास्तु, अष्ट-दिग्पाल तथा पार्थ देवता की वैदिक मंत्रों का उच्चारण करके पूजा करनी चाहिए। शत्रु की मूर्ति बनाकर उसकी छाती में बाण मारना चाहिए।

ब्राह्मणों की पूजा करके हाथी घोड़ों आदि के अस्त्र-शस्त्रों का निरीक्षण करना चाहिए। तब कहीं अपने महल में लौटना चाहिए। जो राजा प्रति वर्ष इस प्रकार ‘विजया’ करता है उसकी शत्रु पर सदैव विजय होती है। दशहरा मांडने की यही रीति है।

(दोस्तों, उम्मीद है कि आपको dussehra vijayadashami ke bare mein hindi mein के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी. अगर आपके मन में कोई सवाल है तो तुरंत पूछें। हम उसका जवाब देंगे। नीचे कमेंट करें। आपके सहयोग से ही हमें आगे बढ़ना है। इसलिए प्लीज हमारे वेबसाइट kyahotahai.com को गूगल पर सर्च करते रहें और अपने पसंद का आर्टिकल पढ़ते रहें।


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