Category: व्रत कथा

ग्रहण

ग्रहण

सूर्य ग्रहण पर प्रभास में स्नान करने का बड़ा माहात्म्य है। कहते हैं भगवान श्री कृष्ण सपरिवार प्रभास में स्नान करने आए थे। ‘प्रभास’ तीर्थ काठियावाड़ में है। इस दिन…

कुंभ मेला

कुंभ

कुंभ-पर्व के मनाने के पवित्र तीर्थ हैं-हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन तथा नासिक कुंभ का पर्व चन्द्रमा, सूर्य तथा वृहस्पति ग्रहों के संयोग से होता है। इन चारों तीर्थों पर पृथक्-पृथक् राशि…

सक्रान्ति व्रत

जिस समय सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है उस समय को ‘संक्रान्ति’ कहते हैं। किसी भी संक्रान्ति का जिस दिन संक्रमण हो उस दिन प्रातःकाल स्नानादि…

प्रदोष व्रत

प्रदोष से तात्पर्य है रात्रि का आरम्भ। इस व्रत के पूजन का विधान इसी समय होता है, इसलिए इसे ‘प्रदोष व्रत’ कहते हैं। यह व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को…

अधिमास व्रत

जिस मास में सूर्य-संक्रान्ति नहीं होती, उसे ‘अधिमास’ कहते हैं। जिसमें दो संक्रान्तियाँ पड़ती हैं, वह ‘क्षयमास’ होता है। अधिमास ३२ मास १६ दिन तथा चार घड़ी के अन्तर से…

श्री सत्यनारायण व्रत कथा

यह व्रत किसी भी दिन किया जा सकता है। हमारे देश में पूर्णिमा के दिन इस व्रत को करने का विशेष माहात्म्य है। इसके अतिरिक्त संक्रान्ति, अमावस्या अथवा एकादशी को…