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इस दिन भगवान राम लंका पर आक्रमण करने के लिए समुद्र तट पर पहुँचे थे। जब समुद्र ने राम को पार उतरने का मार्ग नहीं दिया, तब भगवान राम ने समुद्र तट पर निवास करने वाले ऋषियों से उपाय पूछा। ऋषियों ने कहा- “हे राम! आप तो अनन्त सागरों को पार करने वाली सर्वशक्ति हो। फिर भी यदि आपने पूछा ही है तो सुनो- – हम ऋषि-मुनि प्रत्येक काम को शुरू करने से पूर्व व्रत आदि अनुष्ठान करते हैं। आप भी ‘फाल्गुन कृष्णा एकादशी’ का विधिपूर्वक व्रत कीजिए। एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसे सतनाज पर स्थापित करो। उसके पास पीपल, आम, बड़ तथा गूलर के पत्ते रखो। एक बर्तन जौ से भरकर कलश पर स्थापित करो। जौ के बर्तन में श्री लक्ष्मीनारायण की स्थापना करके उनका विधिपूर्वक पूजन करो । रात्रि जागरण के पश्चात् प्रातःकाल जल-सहित कलश को सागर के निमित्त अर्पित कर दो। इस व्रत के प्रभाव से आपको समुद्र पथ भी दे देगा और रावण पर भी विजय होगी। तभी से इस व्रत का प्रचलन हुआ है।


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