यह विक्रमीय संवत्सर की अन्तिम रात है। इस रात्रि के पश्चात् का प्रभात नये वर्ष का श्रीगणेश होता है। इस प्रभात बेला में नये साल के नये-नये संकल्प करने चाहिए। पुराने वर्ष की उपलब्धियों तथा दोषों का मूल्यांकन करना चाहिए। इस रात्रि में भगवद् भजन करके भगवान नारायण का स्मरण करना चाहिए जो हमारे सारे पापों को नष्ट करने वाले हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का जप भी करना चाहिए। नये वर्ष में शुभ कार्य करने का संकल्प लेकर बड़ों को प्रणाम करना चाहिए। शुद्धाचरण का अभ्यास करना चाहिए।

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