सिख संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी का जन्म सम्वत् १५२६ की कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था। नानक सिख धर्म के आदि प्रवर्तक थे। इन्होंने अपने विचार बोलचाल की भाषा में प्रकट किए। हिन्दू-मुसलमानों के आपसी भेदों को मिटाकर प्यार से रहने का अपदेश दिया। एक बार ये व्यापार के लिए धन लेकर चले पर उसे साधु-संग में खर्च करके लौट आए। इनके पिता इस पर बड़े नाराज हुए। बाद में इनका विवाह सुलक्षणा से हो गया। दो पुत्र भी हुए। पर गृहस्थी में इनका मन न लगा। गृह त्याग देश-विदेश घूमने के लिए निकल पड़े। देश-प्रेम, दया व सेवा का महामंत्र इन्होंने लोगों को दिया। ये सभी धर्मों को आदर की दृष्टि से देखते थे। अनेक उनके शिष्य बन गए। आज के दिन उनकी वाणियों का श्रद्धा से पाठ किया जाता है।

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