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लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं? अप्रत्यक्ष लोकतंत्र का क्या अर्थ है? लोकतंत्र को अंग्रेजी में क्या कहा जाता है? loktantra ka shabdik arth kya hota hai? भारत में लोकतंत्र है कैसे?

भारत एक लोकतांंत्रित देश है। आप जब भी यह सुनते होंगे आपके मन में पहला सवाल यही आता होगा कि loktantra ka shabdik arth kya hota hai? आखिर लोकतंत्र है क्या? किसे लोकतंत्र कहते हैं? लोकतंत्र में सबसे मजबूत कौन होता है? लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? आपके मन में आने वाले इन सारे सवालों का जवाब आज हम इस आर्टिकल में देने जा रहे हैं। तो आर्टिकल पूरा पढ़िएगा और इस जरूरी जानकारी को शेयर जरूर करिएगा। चलिए शुरू करते हैं-

लोकतंत्र यानी जनता का तंत्र यानी लोगों का शासन। मतलब आप समझ ही गए होंगे कि अगर कोई कहे कि भारत में लोकतंत्र कैसे है? तो आप सीधा जवाब दे सकते हैं कि यहां जनता का शासन है। यानी जनता ही यहां सर्वोपरि है। इसलिए जहां जनता का शासन हो, जनता का तंत्र हो उसे लोकतंत्र कहते हैं। भारत, अमेरिका जैसे देश इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं।

तो कुल मिलाकर लोकतंत्र ऐसी शासन व्यवस्था है जहां जनता सर्वोच्च है। लोगों के बीच से ही लोगों द्वारा कुछ लोग चुनकर जाते हैं जो सरकार चलाते हैं, लेकिन यह सरकार जनता ही चुनती है। इसलिए यह जनता के प्रति जिम्मेदार होती है। जनता जब चाहे तब इन्हें हटा सकती है। मतलब यह कि सारी ताकत यहां जनता के हाथ में है।

हालांकि जब जनता द्वारा चुने हुए यही राजनेता सदन में जाने के बाद उल्टे सीधे काम करते हैं या फिर कुछ इस तरह के कदम उठाते हैं जिससे जनता को ही खामियाजा भुगतना पड़ता है तो कई बार लोकतंत्र के इस बनावट पर भी सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इसके बावजूद इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वर्तमान में दुनिया में जितने भी शासन व्यवस्था हैं, उसमें लोकतंत्र सबसे बेहतर है। तो चलिए आपको अब विस्तार से लोकतंत्र के बारे में पूरी जानकारी देते हैं और सबसे पहले बताते हैं कि लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ क्या होता है- loktantra ka shabdik arth kya hota hai

लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ क्या होता है हिंदी में | loktantra ka shabdik arth kya hota hai

लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है लोक और तंत्र। लोक यानी जनता और तंत्र यानी शासन। तो लोकतंत्र का मतलब जहां जनता का शासन हो। लोगों का शासन हो। लोगों के लिए, लोगों के द्वारा, लोगों का शासन ही लोकतंत्र है। विकिपीडिया में लिखा गया है, लोकतन्त्र एक ऐसी शासन प्रणाली है, जिसके अन्तर्गत जनता अपनी स्वेच्छा से निर्वाचन में आए हुए किसी भी दल को मत देकर अपना प्रतिनिधि चुन सकती है, तथा उसकी सत्ता बना सकती है।

अलग-अलग लोगों ने लोकतंत्र की अलग-अलग परिभाषा भी दी है। अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र के बारे में कहा है, अब्राहम लिंकन, जो अमेरिका के 16वे राष्ट्रपति थे। उनके अनुसार लोकतंत्र की परिभाषा इस प्रकार हैं। अब्राहम लिंकन के अनुसार लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा तथा जनता के लिए शासन है। लोकतंत्र में ऐसी व्यवस्था रहती है की जनता अपनी मर्जी से सरकार चुन सकती है। लोकतंत्र एक प्रकार का शासन व्यवस्था है, जिसमें सभी व्यक्ति को समान अधिकार होता है। एक अच्छा लोकतंत्र वह है जिसमें राजनीतिक और सामाजिक न्याय के साथ-साथ आर्थिक न्याय की व्यवस्था भी है। देश में यह शासन प्रणाली लोगों को सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करती है।

लोकतंत्र में शासन की मूल शक्ति जनता में निहित होती है। जनता जब जिसे चाहे सरकार में ला सकती है और पसंद ना आने पर सरकारों को खारिज भी कर सकती है। जो भी प्रतिनिधि चुने जाते हैं सभी जनता के अनुसार ही चुने जाते हैं और इसलिए वे जनता के प्रति जवाबदेह भी होते हैं। सिले के मुताबिक- जिसमें जनता की सहभागिता हो उसे लोकतंत्र कहते हैं।

वहीं, अरस्तू लोकतंत्र शब्द से ही संतुष्ट नहीं दिखते हैं बल्कि वे इसकी आलोचना करते कई जगह दिखते हैं। अरस्तू लोकतंत्र को एक विकृत शासन प्रणाली बताते हैं और कहा कि यह भीड़तंत्र का रूप धारण कर लेता है। वहीं ग्रीस दार्शनिक और अरस्तू के गुरु प्लेटो भी मानते थे कि लोकतंत्र से ही तानाशाही जन्म लेती है। loktantra ka shabdik arth kya hota hai के तहत अब जानते हैं कि लोकतंत्र कितने प्रकार का होता है।

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लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं?

लोकतंत्र के दो प्रकार होते हैं। अप्रत्यक्ष लोकतंत्र और प्रत्यक्ष लोकतंत्र। प्रत्यक्ष लोकतंत्र में हर निर्णय में सीधे जनता की भागीदारी होती है लेकिन अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और फिर प्रतिनिधि उनके हितों के बारे में निर्णय लेते हैं। आजकल ज्यादातर जगह अप्रत्यक्ष लोकतंत्र ही है। जैसे अपने देश में देख लीजिए- यहां जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है और फिर वे जनता के लिए काम करते हैं। चलिए विस्तार से दोनों के बारे में बताते हैं-

प्रत्यक्ष लोकतंत्र क्या है हिंदी में | Pratyaksh loktantra kya hai

विकिपीडिया के मुताबिक प्रत्यक्ष लोकतंत्र को सीधा लोकतंत्र भी कहते हैं। इसमें नागरिक सीधे सारे महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर मतदान करते हैं। इसे प्रत्यक्ष कहा जाता है क्योंकि सैद्धांतिक रूप से इसमें कोई प्रतिनिधि या मध्यस्थ नहीं होता। आसान भाषा में कहें तो प्रत्यक्ष लोकतंत्र वाले देश में जो भी नीतियां बनती हैं, उसके लिए जनता सीधे मतदान करती है। यानी कौन सा नियम लागू होगा और कौन सा नियम लागू नहीं होगा इसका सीधा फैसला जनता करती है, वही प्रत्यक्ष लोकतंत्र है। आज भी छोटे देशों में जहां जनसंख्या बेहद कम है, वहां प्रत्यक्ष लोकतंत्र है।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र क्या है हिंदी में | apratyaksh loktantra kya hai

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र उसे कहा जाता है जहां देश की जनता अपने मनपसंद प्रतिनिधियों को चुनती है और वह प्रतिनिधि देश के लिए कानून बनाते हैं और उसे लागू करवाते हैं। भारत सहित जितने भी देश जहां पर जनसंख्या बहुत अधिक है, वहां पर अप्रत्यक्ष लोकतंत्र ही है। ऐसा इसलिए क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या में संभव ही नहीं है कि हर नियम कानून के लिए सीधे जनता से मतदान करवाया जाए।

ऐसे में साफ है कि अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में किसी भी तरह के निर्णय लेने में जनता की भूमिका बेहद सीमित है। जनता ने जो प्रतिनिधि चुना है अब वही तय करेगा कि कौन सा नियम बनेगा और कब लागू होगा। अब भारत का ही उदाहरण लें तो यहां जनसंख्या बहुत अधिक है। ऐसे में देश को कई निर्वाचन क्षेत्रों में बांट दिया गया है।

अब यहां चुनाव होता है और जनता अपना प्रतिनिधि चुन लेती है। ये प्रतिनिधि संसद पहुंचते हैं और अब यहां से जनता का रोल खत्म हो जाता है। अब उनके चुने हुए प्रतिनिधि आगे की हर नीतियों और नियम कानूनों के लिए उत्तरदायी होते हैं। जैसे- कोई नया कानून बन रहा है तो वह कानून आना चाहिए कि नहीं, इस पर बहस और मतदान करने का हक अब जनता को नहीं है बल्कि इन्हें प्रतिनिधियों को है।

(दोस्तों, उम्मीद है कि आपको loktantra ka shabdik arth kya hota hai इसके बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अब भी आपके मन में कोई सवाल है तो प्लीज नीचे कमेंट करें हम तुरंत जवाब देंगे। यहां इसी तरह आते रहिए और प्यार लूटाते रहिए। लव यू )




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