...जब भगवान गणेश को दिया था दंड  एक बार परशुराम जी भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे थे। लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें दर्शन से रोक दिया। कहते हैं कि भगवान परशुराम इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने गणेश भगवान का एक दांत तोड़ दिया। हालांकि इसी घटना के बाद से भगवान गणेश को एकदंत भी कहा जाने लगा।

भगवान कृष्ण को क्यों सौंपा था चक्र आपको सीता स्वयंवर तो याद ही होगा। उस समय भगवान शिव का धनुष तोड़े जाने के बाद भगवान परशुराम अत्यंत क्रोधित थे। तब लक्ष्मण ने उनसे संवाद कर उनका क्रोध और बढ़ा दिया था। हालांकि बाद में भगवान राम ने उन्हें अपने अवतार से परिचित कराया। कहा जाता है कि इसी दौरान भगवान राम ने उन्हें अपना सुदर्शन चक्र सौंप दिया था। उन्होंने परशुराम से कहा था कि द्वापर युग में जब मैं आऊंगा तब मुझे इसकी जरूरत पड़ेगी। तो इसी चक्र को द्वापर में भगवान परशुराम ने भगवान कृष्ण को सौंपा था। 

परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का नाश किया था जब सम्राट सहस्त्रार्जुन का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। परशुराम को उनकी मां से पता चला कि सहस्त्रार्जुन ने उनके आश्रम में आग लगा दी और कामधेनु को भी छीन ले गया है तब वे इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने पृथ्वी को दुष्ट क्षत्रियों से रहित करने का प्रण ले लिया। कहते हैं कि परशुराम ने सहस्त्रार्जुन की अक्षौहिणी सेना का विनाश कर दिया। विनाश करने के लिए उन्होंने 21 बार क्षत्रियों का सर्वनाश किया।

भगवान परशुराम ने कर्ण को किया श्राप दिया था एक बार भगवान परशुराम ने कर्ण को भी श्राप दिया था। कर्ण ने झूठ बोलकर भगवान परशुराम ने शिक्षा ग्रहण की थी। इसकी जानकारी मिलते ही वे क्रोधित हो गए। उन्होंने शाप दिया कि जा तूने झूठ बोला है तो जब जरूरत पड़ेगी तब तू मेरी इस विद्या को भूल जाएगा। युद्ध में वही हुआ और कर्ण इसी विद्या को भूल जाने के कारण मारा गया। 

भगवान शिव के परशु अस्त्र के कारण नाम पड़ा परशुराम आपको मालूम होना चाहिए कि भगवान परशुराम के पास जो सबसे खतरनाक हथियार परशु अस्त्र था उसे भगवान शिव ने ही उन्हें दिया था। इस अस्त्र के सामने अच्छे-अच्छे योद्धा हार मान जाते थे। कहा जाता है कि भगवान शिव ने उन्हें यह अस्त्र लोक कल्याण के लिए दिया था। इसी परशु अस्त्र के कारण वे परशुराम कहलाए।