उमा महेश्वरव्रत (भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा)

इस दिन शैव व वैष्णव मत के प्रवर्तक एक दूसरे से अपनी कट्टरता के कारण एक प्रकार की शत्रुता का अनुभव करते हैं। इस व्रत का उल्लेख ‘मत्स्य पुराण’ में…

वामन जयन्ती(भाद्रपद शुक्ल द्वादशी)

इस दिन श्रवण नक्षत्र का होना बहुत बड़ा पुण्य माना गया है। इस पर्व पर व्रत करके भगवान वामन की स्वर्ण मूर्ति के समक्ष ५२ पेड़े तथा ५२ दक्षिणाएँ रखकर…

पद्मा एकादशी (भाद्रपद शुक्ल एकादशी)

आषाढ़ माह से शेष- शैय्या पर निद्रा-मग्न भगवान विष्णु, भादों की शुक्ल पक्ष की एकादशी को करवट बदलते हैं। इस एकादशी को ‘पद्मा एकादशी’ या ‘वर्तमान एकादशी’ भी कहते हैं…

राधाष्टमी(भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)

इस दिन श्रीकृष्ण की बालसहचरी तथा अह्लादिनी शक्ति राधा का जन्म हुआ था। राधा विश्व की प्रेमिका थीं। प्रेम के साम्राज्य की तो वो महारानी हुई हैं। राधा के बिना…

महाकाली महालक्ष्मी पूजन (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)

यह पूजन भादों शुक्ला अष्टमी से आरम्भ होकर आश्विन की कृष्णाष्टमी तक चलता है। स्त्रियाँ कच्चे सूत के गंडे बनवाती हैं। इसमें सोलह धागे होते हैं। इसमें सोलह गांठें लगाई…

दूर्वाष्टमी (भाद्रपद शुक्ल अष्टमी)

इस दिन सात प्रकार के फल, पुष्प, दूर्वा तथा नैवेद्यादि अर्पण करके पार्वती तथा शिवजी का पूजन एवं व्रत करने से सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

आखिर क्यों मनाते है मकर-संक्रान्ति (माघ कृष्ण प्रतिपदा)

जितने लम्बे समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्र लगाती है, उसे ‘सौर वर्ष’ कहते हैं। पृथ्वी का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना ‘क्रान्ति चक्र’ कहलाता…